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पंजाब में पंचायत चुनावों पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, राज्य सरकार पर आरोप

High court stays panchayat elections in punjab, blames state government
High court stays panchayat elections in punjab, blames state government
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आगामी पंचायत चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार पर सत्ता के खुले दुरुपयोग का आरोप लगाया है। अदालत ने इन चुनावों की आगे की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है, जो कि 15 अक्टूबर को होने थे।

जस्टिस संदीप मौदगिल और जस्टिस दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने कहा कि चुनाव से पहले ही कई उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को मनमाने ढंग से खारिज कर दिया गया, जिससे उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित किया गया। अदालत ने यह भी दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी के अधिकारियों ने कई नामांकन पत्रों को फाड़ दिया और अन्य मामलों में उन्हें बिना उचित कारण के खारिज कर दिया गया।

न्यायालय ने कहा कि इस तरह के कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप घोषित किए गए अधिकांश विजेता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान या आम आदमी पार्टी के विधायकों के साथ जश्न मनाते हुए देखे गए। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी उम्मीदवार को निर्विरोध विजेता घोषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, यह असंवैधानिक है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। न्यायालय ने यह भी बताया कि मतदान का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता। अदालत ने जोर दिया कि पंजाब सरकार की कार्रवाई ने न केवल मतदाताओं के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को भी खतरे में डाल दिया है।

यह मामला 250 से अधिक याचिकाओं के एक समूह के तहत सामने आया है, जिसमें अदालत ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के नामांकन खारिज किए गए, उन्हें सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया।

अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी, जब मामले पर और विचार किया जाएगा।

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