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जालंधर में राजनीतिक संग्राम: कांग्रेस का आप पार्षद मनमीत कौर के खिलाफ प्रदर्शन, पूर्व विधायक राजिंदर बेरी हिरासत में||

Jalandhar Political Drama: Congress Protests Against AAP Councillor, Rajinder Berry Detained
Jalandhar Political Drama: Congress Protests Against AAP Councillor, Rajinder Berry Detained
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पंजाब के जालंधर में राजनीति का माहौल गरमाया हुआ है। वार्ड 47 की पार्षद मनमीत कौर के आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल होने के बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मनमीत ने जनता और पार्टी के भरोसे को तोड़कर गद्दारी की है। इसी सिलसिले में कांग्रेसियों ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके दौरान पूर्व विधायक राजिंदर बेरी और अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

मनमीत कौर, जो वार्ड 47 से कांग्रेस की पार्षद के रूप में चुनी गई थीं, ने जीत के कुछ ही घंटों बाद आम आदमी पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। आप पार्टी के पास बहुमत नहीं था, और इस कदम से कांग्रेस पार्टी को गहरा झटका लगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जनता ने कांग्रेस के चुनाव चिह्न को देखकर मनमीत कौर को वोट दिया था।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनमीत कौर से आग्रह किया कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और पार्टी में वापस आ जाएं। नेताओं ने भरोसा दिलाया कि पार्टी उन्हें पहले की तरह सम्मान देगी।

प्रदर्शन के दौरान जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राजिंदर बेरी समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कांग्रेसियों ने पार्षद मनमीत कौर के घर से थाना भार्गव कैंप तक मार्च निकाला।

थाने के बाहर जमकर नारेबाजी

हिरासत के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने भार्गव कैंप पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के झंडे लिए कार्यकर्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। थाने के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस को मजबूरन गेट बंद करने पड़े।

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने इस तरह का प्रदर्शन किया हो। इससे एक दिन पहले, कांग्रेसी नेताओं ने प्रवीण वासन के घर के बाहर भी प्रदर्शन किया था। प्रवीण वासन, जो कांग्रेस से पार्षद चुनी गई थीं, ने भी आप पार्टी ज्वाइन कर ली थी। उनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेसियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

जालंधर की यह घटना राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और पार्षदों के दल-बदल पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह केवल राजनीतिक दलों की आंतरिक खींचतान नहीं है, बल्कि जनता के भरोसे पर भी चोट है।

जालंधर में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच यह टकराव राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनमीत कौर और प्रवीण वासन अपने फैसलों पर पुनर्विचार करती हैं या नहीं। राजनीतिक दलों को यह भी समझना होगा कि जनता का विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।