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जानिए मकर संक्रांति 2025 तारीख, शुभ मुहूर्त, परंपराएं और महत्व के बारे में

Know about makar sankranti 2025 date, auspicious time, traditions and significance
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मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हर साल कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन मकर संक्रांति का महत्व सबसे अधिक होता है। इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिससे ठंड में कमी और दिन की अवधि बढ़ने लगती है। इसे खिचड़ी पर्व और उत्तरायण पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

यह त्योहार भारत और नेपाल में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन नदी स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व होता है। साथ ही, तिल और गुड़ से बने व्यंजन बनाए जाते हैं, और पतंग उड़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है।

वर्ष 2025 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव सुबह 9:03 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

- पुण्य काल: सुबह 9:03 बजे से शाम 5:46 बजे तक (कुल अवधि: 8 घंटे 42 मिनट) - महा पुण्य काल: सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 45 मिनट)

मकर संक्रांति पर स्नान और दान का मुहूर्त:

इस दिन स्नान और दान का शुभ समय महा पुण्य काल में सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। पुण्य काल में भी स्नान-दान करना शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति से जुड़ी परंपराएं:

1. नदी स्नान और तर्पण: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और पितरों का तर्पण करने की परंपरा है।

2. दान-पुण्य: तिल, गुड़, कंबल, और अन्न का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

3. तिल-गुड़ के व्यंजन: तिल और गुड़ से बने लड्डू, गजक और खिचड़ी जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।

4. पतंग उड़ाना: देशभर में पतंग उड़ाने की परंपरा है, खासकर गुजरात और राजस्थान में यह उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

5. लोहड़ी और पोंगल: पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लोहड़ी और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना व तमिलनाडु में पोंगल के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है।

मकर संक्रांति का महत्व:

मकर संक्रांति को धार्मिक दृष्टि से देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, और दिन बड़े व रातें छोटी होने लगती हैं।

यह त्योहार खेती-किसानी से भी जुड़ा है, क्योंकि यह रबी फसलों की कटाई का समय होता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं और एक-दूसरे को तिल-गुड़ खिलाकर शुभकामनाएं देते हैं।

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