पंजाब में हेडमास्टरों के 810 पद खाली, शिक्षा व्यवस्था पर संकट
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पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है, क्योंकि राज्य में हेडमास्टरों के 810 पद खाली पड़े हैं। हालात इतने चिंताजनक हैं कि तरनतारण और नवांशहर जैसे जिलों में स्थिति और भी खराब हो गई है।
राज्य के कई सरकारी स्कूल बिना स्थायी हेडमास्टरों के संचालित हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों और शिक्षण गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। कई स्कूलों में वरिष्ठ शिक्षकों को ही हेडमास्टर का कार्यभार सौंप दिया गया है, लेकिन इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
राज्य में हेडमास्टरों की 50% डायरेक्ट भर्ती का मामला फिलहाल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। इस वजह से शिक्षा विभाग नई भर्तियां नहीं कर पा रहा है। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि इस देरी के कारण स्कूलों का प्रबंधन अव्यवस्थित हो गया है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षक संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने सरकार से मांग की है कि वह हाईकोर्ट में लंबित मामले का जल्द समाधान निकाले और खाली पदों को शीघ्र भरने के लिए कदम उठाए। उनका कहना है कि शिक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए हेडमास्टरों की नियुक्ति अनिवार्य है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जैसे ही हाईकोर्ट का फैसला आएगा, तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, जब तक यह मामला कानूनी पचड़ों में उलझा रहेगा, तब तक पंजाब के सरकारी स्कूलों को इस प्रशासनिक संकट से जूझना पड़ेगा।