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पर्यावरण नियंत्रण योजना के लिए आवंटित 858 करोड़ में से केवल 1% खर्च, संसद में रिपोर्ट पेश

India Spends Only 1% of ₹858 Crore Pollution Control Fund, Raising Serious Concerns
India Spends Only 1% of ₹858 Crore Pollution Control Fund, Raising Serious Concerns
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नई दिल्ली, 29 मार्च: संसद में 25 मार्च को पेश एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि 'प्रदूषण नियंत्रण योजना' के लिए आवंटित ₹858 करोड़ के बजट में से अब तक महज 1% (₹7.22 करोड़) ही खर्च किए गए हैं। यह चौंकाने वाली स्थिति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने तर्क दिया कि योजना की मंजूरी और निरंतरता को लेकर बनी अनिश्चितताओं के कारण फंड खर्च नहीं हो सका। यह स्पष्टीकरण तब आया जब पिछले दो वित्तीय वर्षों में इस योजना के तहत आवंटित बजट का पूरा उपयोग कर लिया गया था। समिति ने इस स्थिति पर गंभीर आक्रोश व्यक्त करते हुए मंत्रालय को निर्देश दिया कि वायु प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए इस लापरवाही पर पुनर्विचार किया जाए।

भारत में बढ़ते प्रदूषण का असर न केवल मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हाल ही में जारी वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश बन गया है, जबकि दिल्ली को सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में दर्ज किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार सौम्या स्वामीनाथन ने इस समस्या के समाधान के लिए व्यवहारिक कदम उठाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि जैव ईंधन (बायोमास) के स्थान पर LPG का उपयोग बढ़ाया जाए, ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके। इसके लिए गरीब परिवारों को अतिरिक्त सब्सिडी देने की जरूरत होगी।

इसके अलावा, उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के विस्तार, उच्च प्रदूषण वाले वाहनों पर भारी जुर्माने, और उत्सर्जन कानूनों के सख्त क्रियान्वयन की भी सिफारिश की। उन्होंने जोर दिया कि निर्माण स्थलों और उद्योगों को कड़े नियमों का पालन करना होगा, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और पर्यावरण मंत्रालय इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाते हैं। क्या अब प्रदूषण नियंत्रण योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, या यह योजना सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह जाएगी?

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