जालंधर: नगर निगम जालंधर की लापरवाही का खामियाजा शहरवासी पिछले कई वर्षों से भुगत रहे हैं, लेकिन आने वाले 6 महीने और भी मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं। शहर के 85 वार्डों में से 60 वार्ड गंभीर सीवरेज जाम की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन निगम अधिकारी इसे हल करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
टूटी सड़कों से बढ़ेगी परेशानी
सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के तहत शहर की कई मुख्य सड़कों को खोदकर पाइप बिछाने का काम फिर से शुरू होने जा रहा है। इसके कारण अगले 4-6 महीनों तक 50 किलोमीटर लंबी सड़कें खुदी रहेंगी, जिससे यातायात और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। निगम अधिकारियों ने इस काम को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इससे पहले 48 किलोमीटर सड़क खोदने में तीन साल लग चुके हैं, जिससे इसकी समयसीमा को लेकर संदेह बना हुआ है।
नगर निगम की खराब परफॉर्मेंस के चलते आम आदमी पार्टी (AAP) को पहले भी लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। अगर सीवरेज और टूटी सड़कों की समस्या जल्द हल नहीं हुई तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह विरोध की लहर का कारण बन सकता है, जिससे सत्ताधारी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कपूरथला चौक से डॉ. अंबेडकर चौक, गुरु रविदास चौक से मॉडल टाउन श्मशानघाट, मॉडल टाउन वाटर टैंक से मैनब्रो चौक, दीपनगर, किशनपुरा, दकोहा फाटक, अरमान नगर, जेपी नगर, मिट्ठू बस्ती रोड, कबीर विहार, राज नगर, अड्डा होशियारपुर से किशनपुरा और वेरका मिल्क प्लांट क्षेत्र की सड़कें खोदी जाएंगी।
सीवरेज जाम की समस्या से परेशान हरगोविंद नगर के निवासियों ने नगर निगम कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी है। वहीं, पार्षद तरसेम लखोत्रा ने भी भार्गव कैंप की समस्या को लेकर निगम में धरना देने का अल्टीमेटम दिया है।
अगर नगर निगम जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो आने वाले समय में शहरवासियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं और राजनीतिक हलकों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।