पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार ने इंदुस जल संधि को निलंबित करने की घोषणा के साथ ही एक बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बने बगलिहार जलविद्युत परियोजना से चेनाब नदी का पानी रोक दिया है। यह नदी “पश्चिमी नदियों” में शामिल है, जिन पर पाकिस्तान को संधि के अनुसार पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। भारत केवल गैर-खपत उपयोग, कृषि व जलविद्युत उत्पादन के लिए इन नदियों का सीमित रूप से उपयोग कर सकता है।
बगलिहार परियोजना एक रन-ऑफ-द-रिवर (Run-of-the-River) जलविद्युत परियोजना है, जिसमें जल संग्रहण की क्षमता सीमित है और वर्तमान में यह 900 मेगावाट बिजली का उत्पादन करती है। इसी तरह की किशनगंगा परियोजना, जो LOC के पास गुरेज़ क्षेत्र में स्थित है, 330 मेगावाट की क्षमता वाली है और इस पर भी पाकिस्तान ने कड़ा ऐतराज जताया था।
पाकिस्तान का आरोप है कि इन परियोजनाओं की डिजाइन और तकनीकी विशेषताएं इंदुस जल संधि का उल्लंघन करती हैं और इससे भारत को युद्ध की स्थिति में रणनीतिक लाभ मिल सकता है। बगलिहार मामले में कई दौर की वार्ताओं के बाद जब सहमति नहीं बनी, तो पाकिस्तान ने विश्व बैंक से हस्तक्षेप की मांग की, जो इस संधि का गारंटर है। विश्व बैंक द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ ने पाकिस्तान की कुछ आपत्तियों को सही ठहराया, लेकिन बांध की ऊंचाई और स्पिलवे के गेट को लेकर उसकी आपत्तियों को खारिज कर दिया।
किशनगंगा परियोजना पर भी पाकिस्तान ने पानी को एक सहायक नदी से दूसरी में मोड़ने पर आपत्ति जताई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया।
हालांकि, भारत द्वारा पानी रोका जाना अस्थायी है क्योंकि बगलिहार डैम सीमित मात्रा में ही पानी रोक सकता है और जलस्तर सीमा तक पहुंचते ही उसे छोड़ना आवश्यक होता है।
इस कदम से पाकिस्तान तिलमिला गया है और उसने चेतावनी दी है कि यदि भारत पानी रोकता है तो इसे युद्ध की कार्यवाही माना जाएगा और वह शिमला समझौते सहित सभी द्विपक्षीय समझौतों को रद्द कर सकता है।