कोलकाता, 10 जून 2025 — पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिया जाने वाला आरक्षण पूरी तरह सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण पर आधारित है, न कि धर्म पर।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोलकाता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद घटाई गई 17 प्रतिशत से 7 प्रतिशत आरक्षण की सीमा अब फिर से राज्य ओबीसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर 17 प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने कहा, “लेफ्ट सरकार के दौरान जो आरक्षण दिया गया था, वह किसी ठोस सर्वे पर आधारित नहीं था। हमारी सरकार ने वैज्ञानिक ढंग से सर्वे करवाया और न्यायमूर्ति असीम बनर्जी की अध्यक्षता वाले आयोग की सिफारिशों को स्वीकार किया है।”
ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में अब तक 140 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया है, जिनमें 49 ‘कैटेगरी ए’ और 91 ‘कैटेगरी बी’ में हैं। इसके अतिरिक्त 50 और समुदायों पर सर्वे चल रहा है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाईकोर्ट के पिछले आदेश से 113 समुदायों को ओबीसी सूची से बाहर कर दिया गया था, जिससे भर्ती प्रक्रिया ठप हो गई थी। “अब जब आरक्षण नीति स्पष्ट हो चुकी है और कानूनी आधार पर लागू की जा रही है, तो सरकारी भर्तियाँ फिर से शुरू की जाएंगी,” उन्होंने कहा।
कुछ मीडिया रिपोर्टों पर नाराज़गी जाहिर करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “कुछ मीडिया संस्थान जानबूझकर भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। हमने पूरी पारदर्शिता के साथ दस्तावेज़ और रिपोर्टें विधानसभा में रखी हैं। ओबीसी की पहचान केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर की गई है, धर्म का इसमें कोई संबंध नहीं है।”
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कुल 140 ओबीसी समुदायों में से 61 हिंदू समुदाय हैं, जबकि 79 अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं। उन्होंने दोहराया कि "झूठ फैलाया जा रहा है कि यह धर्म आधारित आरक्षण है — यह सरासर गलत है।"