लुधियाना उपचुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू को समन भेजने वाले SSP जगतप्रीत सिंह को पंजाब सरकार ने निलंबित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब भारत भूषण आशू को विजिलेंस के सामने पेश नहीं होना पड़ेगा। यह मामला चुनावी माहौल को देखते हुए और भी संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, SSP जगतप्रीत सिंह और भारत भूषण आशू के बीच पहले से घनिष्ठ संबंध थे। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आशू ने ही जगतप्रीत सिंह की नियुक्ति डीएसपी के पद पर करवाई थी। दोनों के बीच निरंतर बातचीत होती रही और राजनीतिक समीकरणों के चलते यह मामला अब सुर्खियों में आ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना उपचुनाव की घोषणा के बाद SSP और आशू के बीच एक गुप्त बैठक भी हुई थी। इसके बाद आशू को जो विजिलेंस समन भेजा गया, वह किसी आधिकारिक आदेश के बिना रातों-रात भेज दिया गया था। इस कदम का उद्देश्य चुनाव के दौरान सहानुभूति बटोरना बताया जा रहा है। SSP के सस्पेंशन और समन की वैधता को लेकर पंजाब की राजनीति में गर्मा-गर्मी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का उदाहरण बता रहा है, वहीं कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक साजिश’ से जोड़ रही है। इस घटनाक्रम का सीधा असर लुधियाना उपचुनाव के परिणामों पर पड़ सकता है।
भारत भूषण आशू को समन भेजने वाला SSP सस्पेंड, विजिलेंस के सामने नहीं होना होगा पेश