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Tuesday, 04 February 2025

बाबा साहेब जी ने जातिवाद ऊँच-नीच की व्यवस्था से पीडि़त लोगों को बराबरी के हक ले कर दिए: बेगमपुरा टाइगर फोर्स |

Baba Saheb Gave Equal Rights to the Oppressed Suffering from Caste Discrimination: Begumpura Tiger Force
Baba Saheb Gave Equal Rights to the Oppressed Suffering from Caste Discrimination: Begumpura Tiger Force

औरतों के हक में आवाज बुलंद करने वाले बाबा साहेब जी का अपमान करना लोकतंत्र की हत्या है: कृष्ण बईऐवाल /धर्मपाल साहनेवाल

होशियारपुर, 4 फ़रवरी ( तरसेम दीवाना ) बेगमपुरा टाइगर फोर्स की एक विशेष बैठक बेगमपुरा टाइगर फोर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मपाल साहनेवाल की अध्यक्षता में फोर्स के सब ऑफिस बूथगढ़ जट्टा में हुई बैठक में विशेष रूप से फोर्स की वाइस चेयरमैन कृष्ण लाल भईऐवाल पहुंचे! बैठक को नेताओं ने संबोधिन करते हुए कहा के एस.सी. समाज, मजलूमों और औरतों के मसीहा और संविधान निर्माता परम आदरणीय डा. बी.आर. अंबेडकर जी की मूर्ति की अमृतसर में हुई बेअदबी की घटना बहुत ही पीड़ादायक और निंदनीय घटना है।

बड़े दुख की बात है कि पूरे संसार को मीरी पीरी, सांझीवालता और इंसानियत का संदेश देने वाली धरती पर भारत के हर वर्ग और औरतों के पक्ष में आवाज बुलंद करने वाले संविधान, लोकतंत्र और न्याय पर आधारित व्यवस्था को स्थापित करने वाली शख्सियत का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि मूल रूप से यह पंजाब के सांस्कृतिक माहौल को बिगाड़ने की साजिश लगती है। उन्होंन े कहा कि पंजाब सरकार को इस घटना की गंभीरता से जांच पड़ताल करनी चाहिए और साजिशकर्ताओं की पहचान करके देशद्रोह और सांप्रदायिक दंगे फैलाने के आरोप में सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा ना धटित हो।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब, संविधान और लोकतंत्र में अटूट विश्वास रखने वाला भारत का हर व्यक्ति ऐसी घिनौनी हरकतें बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रशासन पर विश्वास करते हुए शांति और सद्भाव बनाए रखें। उन्होंने कहा कि मूर्ति तोड़ने वाला व्यक्ति कोई भी हो, उस पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इसने पंजाब में भाईचारा तोड़ने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन से लेकर अब तक बाबा साहेब को इस कारण नफरत का शिकार बनाया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सदियों से जातिवादी ऊँच-नीच की व्यवस्था से पीडि़त लोगों को बराबरी के हक दिलाए और उन्हें सम्मान के साथ जीना सिखाया और ऊँच-नीच की व्यवस्था को टक्कर दी। इस अवसर पर गुरनाम सिंह, बलवीर चंद, किशन लाल, राम जी दास, देस राज लुधियाना आदि उपस्थित थे!