Wednesday, 22 January 2025
Jalandhar
जालंधर में कांग्रेस विधायक और SDM के बीच विवाद: CNG प्लांट मीटिंग में बढ़ा तनाव |
पंजाब के जालंधर जिले के भोगपुर में एक प्रशासनिक बैठक में उस समय तनाव बढ़ गया, जब कांग्रेस के विधायक सुखविंदर सिंह कोटली और आदमपुर के एसडीएम विवेक कुमार मोदी के बीच तीखी बहस हो गई। यह घटना भोगपुर चीनी मिल में बनाए जा रहे सीएनजी प्लांट के मसले पर आयोजित मीटिंग के दौरान हुई।
भोगपुर में आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य सीएनजी प्लांट निर्माण से जुड़े मुद्दों और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर चर्चा करना था। मीटिंग के दौरान एसडीएम विवेक कुमार मोदी ने उपस्थित लोगों को डांटते हुए तीखे लहजे में बात की। इस रवैये से कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली नाराज हो गए।
विधायक ने एसडीएम को टोकते हुए कहा कि यह तरीका जनता के साथ व्यवहार करने का सही तरीका नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को अपनी भाषा और रवैये पर ध्यान देने की सलाह दी। मामला इतना बढ़ गया कि विधायक कोटली ने हाथ जोड़कर मीटिंग से माफी मांगने की मांग की।
हालात तनावपूर्ण हो गए जब एसडीएम ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। विधायक कोटली ने इसका विरोध करते हुए मीटिंग बीच में ही छोड़ दी और वापस लौट गए। उन्होंने प्रशासन के इस रवैये पर नाराजगी जाहिर की और इसे जनता का अपमान बताया।
भोगपुर चीनी मिल में बनाए जा रहे सीएनजी प्लांट को लेकर स्थानीय लोगों में पहले से ही नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्लांट के निर्माण से उनके पर्यावरण और आजीविका पर प्रभाव पड़ेगा। इस मुद्दे पर विधायक और प्रशासन को मिलकर समाधान ढूंढने की जरूरत है, लेकिन मीटिंग में हुए विवाद ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया।
मीटिंग के बाद विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "प्रशासन को जनता के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि उन्हें डांटकर चुप कराना।"
दूसरी ओर, एसडीएम विवेक कुमार मोदी ने अपने रवैये पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने बैठक में उपस्थित लोगों को केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए कहा था और उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था।
यह घटना जालंधर के राजनीतिक और प्रशासनिक वातावरण में चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने विधायक के समर्थन में आवाज उठाई है। वहीं, इस घटना ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है।
सीएनजी प्लांट से जुड़ा यह विवाद केवल पर्यावरण और विकास का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जनता और प्रशासन के बीच भरोसे का भी मामला बन गया है। इस तरह की घटनाएं प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय की आवश्यकता को दर्शाती हैं। सभी पक्षों को जनता के हित में मिलकर काम करना होगा ताकि इस विवाद का समाधान निकाला जा सके।