Friday, 08 November 2024
Political
कांग्रेस ने गुजरात के सफेद प्याज किसानों को दिए जा रहे विशेषाधिकार पर प्रधानमंत्री से सवाल किया
महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के बीच, कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए सवाल उठाया कि क्यों गुजरात के सफेद प्याज किसानों को महाराष्ट्र के प्याज किसानों के मुकाबले प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने महाराष्ट्र के धुले और नासिक में प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों से पहले यह सवाल उठाए। उन्होंने निर्यात प्रतिबंध और महाराष्ट्र के प्याज किसानों की समस्याओं पर मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।
जयराम रमेश ने कहा, दिसंबर 2023 से महाराष्ट्र के प्याज किसान निर्यात प्रतिबंधों के कारण गंभीर संकट में हैं। राज्य ने इस साल कम बारिश और जल संकट का सामना किया, जिसके चलते किसान अपनी सामान्य फसल का केवल 50 प्रतिशत उत्पादन कर पाए। फिर जब फसल कटी, तो निर्यात प्रतिबंध लगाकर किसानों की कठिनाइयां बढ़ा दी गईं, जिससे बाजार में प्याज की कीमतें बहुत कम हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने गुजरात के सफेद प्याज के निर्यात की अनुमति दी, जबकि महाराष्ट्र के लाल प्याज किसान इस अवसर से वंचित रह गए।
रमेश ने यह भी बताया कि वर्तमान में प्याज के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगा हुआ है, जो महाराष्ट्र के प्याज किसानों के लिए और भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा, गुजरात के प्याज किसानों को प्राथमिकता देने का निर्णय क्यों लिया गया?
रमेश ने भाजपा पर महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के वन अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2006 में कांग्रेस द्वारा लागू वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) आदिवासियों को उनके जंगलों के प्रबंधन और आर्थिक लाभ प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है। लेकिन, रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इस अधिनियम के कार्यान्वयन में बाधा डालते हुए लाखों आदिवासियों को इससे वंचित रखा है। रमेश के मुताबिक, राज्य में दायर 4,01,046 व्यक्तिगत दावों में से केवल 52 प्रतिशत को ही मंजूरी मिली है, जबकि सामुदायिक अधिकारों के लिए पात्र 50,045 वर्ग किलोमीटर में से मात्र 23.5 प्रतिशत क्षेत्र को ही आवंटित किया गया है।
कांग्रेस महासचिव ने यह भी सवाल किया कि महायुति सरकार ने नासिक नगर निगम के चुनाव क्यों नहीं कराए। रमेश ने कहा कि ओबीसी आरक्षण और वार्ड परिसीमन जैसे मुद्दों को कारण बताकर चुनाव में देरी की जा रही है, लेकिन असल में सरकार मतदाताओं के सामने जाने से घबरा रही है।
उनकी यह टिप्पणी महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए प्रचार के बीच आई है। मतगणना 23 नवंबर को होगी।
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