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Tuesday, 17 December 2024

दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों ने अपनाया हाइब्रिड(Hybrid) मोड, AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा||

Delhi-NCR schools hybrid mode
Delhi-NCR schools hybrid mode

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण एक बार फिर स्कूलों को हाइब्रिड शिक्षण मॉडल अपनाने का निर्देश दिया गया है। मंगलवार, 17 दिसंबर 2024 को, AQI 400 के पार पहुंच गया, जिससे वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई। इस स्थिति में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण 4 के तहत सख्त उपाय लागू किए गए हैं।

संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, कक्षा 6-9 और 11 के छात्रों के लिए हाइब्रिड शिक्षण लागू किया गया है, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का विकल्प दिया गया है। हालांकि, कक्षा 10 और 12 के छात्रों को परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्कूल में उपस्थित होना अनिवार्य है।

रोहिणी स्थित सोवेरिन स्कूल की प्रिंसिपल प्रितिका गुप्ता ने बताया, “हम कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित कर रहे हैं, जबकि कक्षा 6 से ऊपर की कक्षाएं ऑफलाइन होंगी। कक्षा 5 तक की परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी, जबकि उच्च कक्षाओं की परीक्षाएं ऑफलाइन होंगी।”

गीतारत्न स्कूल के चेयरपर्सन आर.एन. जिंदल ने कहा, “फिलहाल सभी कक्षाएं ऑफलाइन चल रही हैं, लेकिन हम कक्षा 5 तक की कक्षाओं को जल्द ही ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने की योजना बना रहे हैं। कक्षा 6 से ऊपर की कक्षाएं ऑफलाइन रहेंगी।”

अभिभावकों की चिंताओं के बीच निर्णय द्वारका स्थित आईटीएल स्कूल की प्रिंसिपल सुधा आचार्य ने कहा, “हमारी स्कूल में सभी कक्षाएं ऑफलाइन चलेंगी क्योंकि कक्षा 10 और 12 की परीक्षाएं निकट हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाओं के कारण छात्र पिछड़ रहे हैं, इसलिए हम ऑफलाइन कक्षाओं को जारी रख रहे हैं।”

दिल्ली-एनसीआर में AQI 427 दर्ज किया गया, जिससे प्रदूषण स्तर 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तुरंत चरण 4 के प्रतिबंध लागू कर दिए।

बढ़ते प्रदूषण के बीच स्कूलों को छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई में संतुलन बनाना एक चुनौती बना हुआ है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। हाइब्रिड शिक्षण प्रणाली के जरिए स्कूल छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि, बढ़ते प्रदूषण स्तर ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार के लिए दीर्घकालिक समाधान कब लागू होंगे।