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Tuesday, 10 December 2024

जालंधर में कांग्रेस को झटका, पूर्व मेयर जगदीश राजा का पत्नी संग AAP में जाने का फैसला||

पंजाब: जालंधर नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, पूर्व मेयर AAP में शामिल

पंजाब में आगामी नगर निगम चुनावों से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। जालंधर जिले में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पूर्व मेयर और कांग्रेस नेता जगदीश राजा ने अपनी पत्नी अनीता और अपने समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन थाम लिया है। सूत्रों का मानना है कि आम आदमी पार्टी उन्हें चुनावों के बाद बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

आप में शामिल हुए जगदीश राजा

जालंधर में AAP के पंजाब प्रमुख अमन अरोड़ा और नेता शैरी कलसी की मौजूदगी में जगदीश राजा और उनकी पत्नी का पार्टी में स्वागत किया गया। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जो पहले से ही पार्टी के अंदरूनी कलह से जूझ रही है। यह कोई पहली बार नहीं है जब AAP ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करके कांग्रेस की स्थिति कमजोर की है।

AAP की चुनावी तैयारी

इस बार आम आदमी पार्टी ने चुनावों के लिए नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया है। पार्टी ने वॉलंटियर्स और अन्य इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन मांगे हैं। हाल ही में पार्टी के नेता हरभजन सिंह ईटीओ ने बताया था कि उम्मीदवारों का चयन एक विस्तृत सर्वेक्षण के आधार पर किया जाएगा। माना जा रहा है कि जगदीश राजा और उनकी पत्नी को भी पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी जा सकती है।

कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह

कांग्रेस पहले से ही अंदरूनी कलह का सामना कर रही है। धूरी के पूर्व विधायक दलवीर गोल्डी ने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन कांग्रेस के भीतर इस पर सहमति नहीं बन पाई। कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद उभर कर सामने आए थे।

रवनीत बिट्टू ने साधा निशाना

पार्टी में बढ़ती फूट पर केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की बातों को अनसुना किया जा रहा है।

AAP को उम्मीद

AAP को भरोसा है कि जगदीश राजा जैसे अनुभवी नेता पार्टी के लिए बड़े फायदे का सौदा साबित होंगे। पार्टी ने अपने चुनावी एजेंडे को पूरी तरह जन-समर्थक बनाने के लिए नई रणनीतियां बनाई हैं।

जालंधर की राजनीति में इस बदलाव से न केवल कांग्रेस कमजोर हुई है, बल्कि AAP के लिए संभावनाएं भी बढ़ी हैं। अब देखना होगा कि आगामी नगर निगम चुनाव में यह सियासी कदम किस दिशा में ले जाता है।