Thursday, 05 June 2025
Jalandhar
जालंधर RTO ऑफिस का कारनामा: एक साल से ड्राइविंग लाइसेंस की अप्रूवल लंबित
जालंधर के आर.टी.ओ. (रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस) कार्यालय से एक लापरवाही का मामला सामने आया है,जिसमें एक महिला आवेदक ने 26 अप्रैल 2024 को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था।महिला का एप्लिकेशन नंबर 1521300924 है। हालांकि,आवेदन किए हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है,लेकिन आज तक उस आवेदन को अप्रूव नहीं किया गया है।यह मामला सरकारी कार्यप्रणाली की धीमी प्रक्रिया और लापरवाही को उजागर करता है।
महिला ने सभी आवश्यक दस्तावेज़ समय पर जमा कर दिए थे और प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित आर.टी.ओ. कार्यालय के निर्देशों का पालन भी किया,लेकिन इसके बावजूद न तो लाइसेंस जारी किया गया,न ही आवेदन की स्थिति में कोई अद्यतन दिया गया।इस मामले को लेकर संबंधित महिला और अन्य नागरिकों ने विभागीय अधिकारियों से जवाबदेही की माँग की है।लोगों का कहना है कि समय पर ड्राइविंग लाइसेंस न मिलने से न केवल असुविधा होती है बल्कि कई बार रोज़गार से भी हाथ धोना पड़ता है।
प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि ऐसे मामलों की समयबद्ध जांच की जाए और तकनीकी अथवा प्रशासनिक कारणों से यदि कोई देरी हो रही है तो आवेदकों को उसकी जानकारी दी जाए।
एम.वी.आई.ऑफिस से परेशान लोग — जनता बेहाल,जवाबदेही नदारद
एम.वी.आई. (मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर) कार्यालय जालंधर में लापरवाही और देरी से आम जनता परेशान है।कई आवेदक महीनों से अपने काम—जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट,वाहन रजिस्ट्रेशन आदि—के लिए चक्कर काट रहे हैं,लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।
ऐसे मामले अकेले नहीं हैं,कई अन्य लोगों ने भी बताया कि उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है,कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती,और हर बार नया कारण बताया जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि"ऑनलाइन पोर्टल तो बना दिया गया है,लेकिन जब तक अधिकारी ईमानदारी से काम नहीं करेंगे,तब तक डिजिटल इंडिया भी सिर्फ़ एक नारा रह जाएगा।"लोगों ने जिला प्रशासन और ट्रांसपोर्ट विभाग से मांग की है कि एम.वी.आई.कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए,भ्रष्टाचार और टालमटोल को रोका जाए,और जनता को समय पर सेवाएं प्रदान की जाएं।
अधिकारियों की आईडी बनी होने के बावजूद लोगों को करना पड़ रहा है पेशी का सामना जालंधर आरटीओ ऑफिस में अफसरों की ID (डिजिटल सिग्नेचर ID) सक्रिय होने के बावजूद आवेदकों को फिजिकल रूप से ऑफिस में जाकर अपनी फाइल्स के लिए पेश होना पड़ रहा है।यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब डिजिटल प्रक्रिया के तहत काम को आसान और पारदर्शी बनाने की बात की जाती है,लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल उल्टे हैं। अगर डिजिटल आईडी मौजूद है,तो अप्रूवल ऑनलाइन क्यों नहीं हो रहा? यह सवाल अब आम जनता और मीडिया दोनों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।सरकार को चाहिए कि वह इस प्रक्रिया की जांच कर जल्द से जल्द समाधान निकाले, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके लंबित फाइलों की संख्या लगातार बढ़ रही है जालंधर आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी फाइलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर फाइलों की अप्रूवल प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। कुछ आवेदक एक साल से ज़्यादा समय से लाइसेंस के इंतज़ार में हैं. आरटीओ के स्तर पर हो रही देरी ने न केवल आम लोगों की परेशानी बढ़ाई है,बल्कि सरकार के डिजिटलीकरण के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।यह स्थिति साफ तौर पर बताती है कि सिस्टम में या तो इच्छाशक्ति की कमी है या फिर जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा किया जा रहा है। अब ज़रूरत है सख्त कदमों की – सरकार को चाहिए कि वह जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे और पेंडिंग फाइलों को प्राथमिकता से निपटाने के लिए समयबद्ध योजना लागू करे।