Wednesday, 05 March 2025
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पाकिस्तान को आर्थिक संकट के बीच बड़ी राहत, सिंधु नदी में मिला ₹80,000 करोड़ का सोना
इस्लामाबाद: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पाकिस्तान ने सिंधु नदी (Indus River) के तल में विशाल सोने के भंडार का पता लगाया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹80,000 करोड़ बताई जा रही है। यह खोज पंजाब प्रांत के अटक (Attock) जिले में हुई है और इसे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह खोज पाकिस्तान की सरकार द्वारा कराए गए एक सर्वे के बाद हुई, जिसे नेशनल इंजीनियरिंग सर्विसेज पाकिस्तान (NESPAK) और माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट पंजाब ने मिलकर अंजाम दिया। सर्वे के नतीजों के आधार पर सरकार ने सिंधु नदी के आसपास 9 प्लेसर गोल्ड ब्लॉक्स को चिन्हित किया है, जहां से सोने का खनन किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंधु नदी में मिला यह सोना हिमालय क्षेत्र से बहकर आया है। भारत के हिमालय क्षेत्र से निकलने वाली नदियों के साथ यह सोना धीरे-धीरे पाकिस्तान की सिंधु नदी तक पहुंचा और वर्षों में नदी की तलहटी में जमा हो गया।
यह खोज पाकिस्तान के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। दिसंबर 2024 में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपनी गोल्ड रिज़र्व वैल्यू $5.43 बिलियन बताई थी, जो देश की कुल विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा थी।
अगर पाकिस्तान सरकार इस सोने का सही ढंग से खनन कर पाती है, तो यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि विदेशी निवेश को भी आकर्षित कर सकता है।
पाकिस्तानी सरकार अब जल्द ही इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए निविदाएं (bidding) आमंत्रित करेगी। NESPAK और माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट पंजाब इस पूरी प्रक्रिया को संभालेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द खनन कार्य शुरू किया जाए ताकि इस खजाने को भुनाया जा सके।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस खजाने का सही उपयोग तभी हो पाएगा, जब पाकिस्तान सरकार इस परियोजना को पारदर्शिता और कुशल प्रबंधन के साथ लागू करे। भ्रष्टाचार और अव्यवस्था जैसी समस्याएं अगर हावी रहीं, तो यह सोने का भंडार भी पाकिस्तान की आर्थिक हालत सुधारने में नाकाम रह सकता है।
सिंधु नदी में सोने के भंडार की खोज पाकिस्तान के लिए एक ऐतिहासिक आर्थिक अवसर है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान सरकार इस मौके को कैसे भुनाती है और क्या वाकई यह खोज देश की गिरती अर्थव्यवस्था को बचा पाएगी या नहीं।