Tuesday, 29 April 2025
Jalandhar
ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले पर सख्त कार्रवाई के बाद ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर का जालंधर दौरा, पारदर्शिता की दिशा में उठाए कई अहम कदम
पंजाब सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले को लेकर बड़ा एक्शन लेते हुए विजिलेंस विभाग के उच्च अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इस कार्रवाई में एडीजीपी एसपीएस परमार, एआईजी स्वर्नदीप सिंह और जालंधर के एसएसपी हरप्रीत सिंह शामिल हैं। इनकी जगह 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार को विजिलेंस ब्यूरो की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी कड़ी में ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर आज जालंधर के आरटीओ टेस्ट ट्रैक दफ्तर पहुंचे और व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। उन्होंने दस्तावेजों की समीक्षा की और ट्रायल देने आए बच्चों से संवाद कर यह जानने की कोशिश की कि कहीं उनसे गैरकानूनी रूप से पैसे तो नहीं मांगे गए। मंत्री ने बताया कि अब तक ऐसी कोई ठोस शिकायत सामने नहीं आई है।
भविष्य में अनियमितताओं को रोकने के लिए दो नए अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी और ट्रैक पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए ₹1.5 लाख की राशि देने का ऐलान भी किया गया है। पानी और बैठने की व्यवस्था जल्द की जाएगी।
मंत्री ने जानकारी दी कि ड्राइविंग लाइसेंस की पेंडेंसी एक महीने के भीतर खत्म कर दी जाएगी। स्मार्ट चिप की आपूर्ति में देरी करने वाली कंपनी की 5 करोड़ की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई है, और 6 करोड़ की वर्क वैल्यू भी रिकवर की जा रही है। कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
स्टाफ की कमी को देखते हुए नई भर्तियों की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। साथ ही, दलालों की दफ्तर में एंट्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। केवल ट्रायल देने वाले अभ्यर्थियों को ही दफ्तर में प्रवेश मिलेगा। सभी टेस्ट की रिकॉर्डिंग NIC के हेड ऑफिस में होगी, और फेल होने पर टेस्ट रद्द कर दिया जाएगा। भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरटीओ कार्यालय में अब CCTV कैमरों से भी निगरानी की जाएगी।
लर्निंग लाइसेंस को लेकर भुल्लर ने कहा कि बच्चे अपने मोबाइल फोन से भी आवेदन कर सकते हैं, फिर भी बिचौलियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति समझ से परे है। उन्होंने लोगों से अपील की कि डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग करें और पारदर्शिता बनाए रखें।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विजिलेंस अफसरों पर कार्रवाई मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर हुई है, जो खुद इस विभाग की निगरानी करते हैं। सरकार की मंशा साफ है—घोटालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।