भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मंगलवार को लघु और मध्यम उद्यमों (SME) के लिए लिस्टिंग नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा। इन बदलावों में पात्रता शर्तों में संशोधन, न्यूनतम आवेदन मूल्य में वृद्धि, प्रमोटर शेयरों पर लॉक-इन अवधि बढ़ाने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस उपायों को शामिल करना शामिल है।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब SEBI ने SME बाजार में कई अनियमितताओं का पता लगाया, जिनमें आईपीओ फंड्स के डायवर्जन, सर्कुलर लेनदेन, और काल्पनिक ट्रांजेक्शन के जरिए निवेशकों को गुमराह करना शामिल था। नियामक ने कुछ SME कंपनियों पर कार्रवाई भी की है और एक कंपनी की लिस्टिंग को रोक दिया है।
न्यूनतम आवेदन मूल्य को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने का प्रस्ताव है। ऑफर फॉर सेल (OFS) इश्यू साइज का अधिकतम 20% तक सीमित करने का सुझाव। प्रमोटर शेयर लॉक-इन न्यूनतम प्रमोटर योगदान पर लॉक-इन अवधि 5 साल करने का प्रस्ताव। न्यूनतम इश्यू साइज ₹10 करोड़ का न्यूनतम इश्यू साइज तय करने और आईपीओ से पहले के तीन वित्तीय वर्षों में से दो में ₹3 करोड़ का न्यूनतम परिचालन लाभ आवश्यक। आवंटियों की संख्या SME IPO को सफल घोषित करने के लिए न्यूनतम आवंटियों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 करने का विचार। निगरानी एजेंसी की नियुक्ति IPO फंड्स के उपयोग पर निगरानी के लिए एजेंसी अनिवार्य होगी। कॉर्पोरेट गवर्नेंस SME पर मेनबोर्ड कंपनियों की तरह संबंधित-पक्ष लेनदेन और बोर्ड मीटिंग्स की पारदर्शिता के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
इन बदलावों का उद्देश्य SME सेगमेंट में पारदर्शिता, निवेशकों का भरोसा बढ़ाना और संभावित गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना है।
वित्त वर्ष 2023-24 में अब तक SME IPOs का रिकॉर्ड स्तर देखा गया। 196 IPOs के जरिए ₹6,000 करोड़ से अधिक जुटाए गए, जबकि चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक 159 IPOs ने ₹5,700 करोड़ से ज्यादा जुटाए हैं।
SEBI, SME कंपनियों को मेनबोर्ड पर माइग्रेट करने के लिए कड़े मानदंड पेश करने की योजना बना रहा है।
नए नियमों से SME बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम छोटे और मझोले उद्यमों के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूती देगा।
SEBI proposes changes in SME listing rules, IPO norms to be stricter