नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लोकसभा में “प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल” पेश किया है। इस बिल का उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को नियंत्रित करना और पैसे वाले गेम्स पर सख्त पाबंदी लगाना है।
अगर यह बिल संसद से पास हो जाता है, तो भारत में सभी ऐसे ऑनलाइन गेम्स पर रोक लग जाएगी जिनमें पैसे का लेन-देन शामिल होता है। इसमें फैंटेसी स्पोर्ट्स, रमी, पोकर, बेटिंग और कैश-बेस्ड मोबाइल गेम्स शामिल हो सकते हैं।
बिल के मुताबिक, केवल ऐसे गेम्स को अनुमति दी जाएगी जो स्किल डेवलपमेंट, एजुकेशन या एंटरटेनमेंट से जुड़े हों और जिनमें जुआ या पैसों की सट्टेबाजी न हो।
इस कदम से सबसे बड़ा झटका फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म्स जैसे ड्रीम-11 को लग सकता है, जो भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य स्पॉन्सर है। अगर बिल पास हो जाता है, तो यह स्पॉन्सरशिप भी खतरे में पड़ जाएगी। वहीं, लाखों यूज़र्स जो ऐसे गेम्स पर पैसा लगाते हैं, उन्हें भी बड़ा झटका लग सकता है।
सरकार का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है लेकिन इसके कारण युवा वर्ग में लत, कर्ज और आर्थिक नुकसान जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं। इसी वजह से इसे रेगुलेट करना जरूरी है।
केंद्र ने यह भी साफ किया है कि ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को लाइसेंस लेना होगा और सभी गेम्स को एक केंद्रीय अथॉरिटी से मंजूरी के बाद ही लॉन्च किया जा सकेगा।
भारत में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री का अनुमानित कारोबार 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। ऐसे में इस बिल के पास होने पर कंपनियों, निवेशकों और विज्ञापनदाताओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कुछ विपक्षी दलों ने इसे रोज़गार और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर प्रहार बताते हुए विरोध जताया है। उनका कहना है कि हजारों लोग इन कंपनियों में नौकरी करते हैं और लाखों छोटे निवेशक भी इससे जुड़े हुए हैं।
बिल फिलहाल लोकसभा में पेश किया गया है और चर्चा के बाद इसे राज्यसभा भेजा जाएगा। अगर दोनों सदन से पास हो जाता है तो भारत में कैश-बेस्ड ऑनलाइन गेमिंग का अध्याय बंद हो सकता है।