कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना अल्बर्टा के एडमंटन में हुई बताई जा रही है, जहां हाल ही में सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) नामक संगठन द्वारा तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह का आयोजन किया गया था।
वीडियो में कुछ लोग भारतीय तिरंगे को फाड़ते और उसका अपमान करते दिख रहे हैं। यह घटना उस दौरान की बताई जा रही है जब एडमंटन में अल्बर्टा विधानसभा परिसर के बाहर खालिस्तान जनमत संग्रह का कार्यक्रम चल रहा था। आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए थे।
क्या है पूरा मामला?
18 अक्टूबर 2026 को एडमंटन में SFJ ने ‘पंजाब स्वतंत्रता जनमत संग्रह’ नाम से एक गैर-बाध्यकारी कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें प्रतिभागियों से पूछा गया कि क्या भारत के पंजाब क्षेत्र को अलग खालिस्तान राज्य बनाया जाए। संगठन का दावा है कि इसमें 23,000 से अधिक वोट पड़े।
इस कार्यक्रम के दौरान भारतीय तिरंगे को जमीन पर रखने और उसके अपमान से जुड़े दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। एक वीडियो में लोग तिरंगे को फाड़ते हुए भी दिख रहे हैं। कई भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों और भारत में इस घटना की कड़ी निंदा की जा रही है।
भारत की प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि
भारत सरकार SFJ को आतंकवादी संगठन मानती है और उसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत में नामजद आतंकवादी घोषित कर चुकी है। भारत बार-बार कनाडा से अपील करता रहा है कि वह अपनी धरती से खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियों पर अंकुश लगाए।
इस घटना ने एक बार फिर भारत-कनाडा संबंधों में खालिस्तान मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ा दिया है। कनाडाई सिख समुदाय के एक बड़े हिस्से ने हमेशा ऐसे अलगाववादी तत्वों से दूरी बनाए रखी है और कहा है कि खालिस्तान समर्थक पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
इस वीडियो के वायरल होने के बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स में भारी आक्रोश है। लोग कनाडाई प्रशासन से ऐसे कृत्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
दूसरी ओर, कुछ खालिस्तानी समर्थक इस घटना को अपनी ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ बता रहे हैं। हालांकि ज्यादातर स्वतंत्र पर्यवेक्षक इसे उकसावे और घृणा फैलाने वाला कृत्य मान रहे हैं।
नोट: यह घटना सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और रिपोर्ट्स पर आधारित है। कनाडाई पुलिस या स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घटना की पूरी जांच और पुष्टि अभी बाकी है।